'जगेश्वर-उमा स्मृति कहानी सम्मान' प्रतियोगिता 2019 - प्रणाम पर्यटन

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मंगलवार, 22 जनवरी 2019

'जगेश्वर-उमा स्मृति कहानी सम्मान' प्रतियोगिता 2019

'जगेश्वर-उमा स्मृति कहानी 
सम्मान' प्रतियोगिता 2019  
पर्यटन व साहित्य को समर्पित त्रैमासिक पत्रिका ''प्रणाम पर्यटन'' अपने तीसरी वर्षगांठ पर 
पत्रिका के प्रेरणास्रोत 'बाबू एवं अम्मा' की याद में अब हर वर्ष कहानी प्रतियोगिता का आयोजन 
करेगी ,जिसमे से तीन कहानियो को प्रथम (2000/-),द्वितीय(1500/-) एवं तृतीय(1000) का नकद 
राशि के साथ 'प्रमाणपत्र' प्रदान करेगी। इसके साथ प्रतियोगिता में शामिल होने वाली सभी कहानियों 
के कहानिकरों को 'प्रशंसा प्रमाणपत्र' के साथ पत्रिका की वार्षिक सदस्यता निःशुल्क प्रदान की जाएगी।
नियम व शर्तें :- 
1- कहानी प्रतियोगिता में देश-विदेश के सभी लोग भाग ले सकते है।
2- कहानी 3000 (तीन हज़ार) शब्दों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
3- कहानी मंगल,अपराजिता,यूनिकोड या फिर कुर्तिदेव (10) में टाईप होनी चाहिए। 
4- कहानी के साथ अपना बायो-डाटा,नवीनतम रंगीन फोटो, सहित पत्रव्यवहार का पता ,संपर्क नंबर 
     एवं कहानी मौलिकता प्रमाण पत्र जरूर संलग्न करें कि कहानी आप की अपनी व मौलिक है। 
5- कहानी को केवल नीचे के मेल पर ही भेजें। अन्य मेल पर भेजी जाने वाली कहानी स्वीकार नहीं की जाएगी। 
6- भेजने के बाद किसी तरह कि पूछताछ कहानी के संदर्भ में न करें। कहानी मिलने व निर्णय की जानकारी             कहानीकर को निज़ी तौर पर दे दी जाएगी ।      
7- प्रतियोगिता के परिणाम की घोषणा 'प्रणाम पर्यटन' के जुलाई-सितंबर-2019 के अंक में तो दी ही
     जाएगी,साथ हीसभी सोशल नेटवर्क के साथ-साथ www.pranamparyatan.com पर भी उपलब्ध होगी। 
8- प्रतियोगिता में शामिल कहानियों का चयन देश के प्रतिष्ठित कहानीकारों का एक प्रतिनिधि मण्डल करेगा । 
9- प्रतियोगिता के परिणाम की घोषणा कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती के दिन 31 जुलाई-2019 को 
   की जाएगी। 
10- प्रतियोगिता में शामिल सभी कहानियों का सर्वाधिकार 'प्रणाम पर्यटन'के सुरक्शित रहेगा। 
    किसी प्रकार का कानूनी विवाद का क्षेत्र लखनऊ न्यायलय ही होगा। 
         Mail :- publicationpranam@gmail.com
       कहानी भेजने की अंतिम तारीख 20 जून 2019 है । 
         (उसके बाद कोई भी कहानी प्रतियोगिता में शामिल नहीं की जाएगी।)
                        

1 टिप्पणी:

  1. चूँकि पत्रिका हिन्दी की है,यह बहुत ज़रूरी है कि हिन्दी शुद्ध लिखी जाए।जहाॅ तक हो सके वह प्रवाहमय हिन्दुस्तानी हो।रोजमर्रा की खूबसूरत ज़ुबान।यहाॅ अशुद्ध हिन्दी लिखी गई है।यह ठीक करें।अवार्ड की शुरुआत बहुत उम्दा कदम है।
    मुबारक हो!मेरी नेक तमन्नाऐ कुबूल करे।

    उत्तर देंहटाएं

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